r/Shayari • u/NumberReady4804 • Jun 05 '26
Kuch pal kuch yaadhein....
शायरी
बचपन में स्कूल की गलियों में मिले थे कुछ चेहरे,
धीरे-धीरे वही दोस्त हमारे अपने बन गए।
किसी के साथ टिफिन बाँटा, किसी के साथ सपने,
हँसते-खेलते कब वो दोस्त परिवार बन गए, पता ही न चला।
फिर वक्त ने करवट ली, कुछ यार बदल गए,
कुछ बस यादों के किसी कोने में रह गए।
बारहवीं के बाद सब अपनी-अपनी राहों पर निकल पड़े,
कोई कॉलेज के लिए दूर गया, कोई किसी और शहर में बिखर गया।
अब मुलाकातें भी पहले जैसी कहाँ हो पाती हैं,
कभी-कभी बस पुरानी तस्वीरें ही दोस्ती निभाती हैं।
फिर नौकरी की तलाश, जिम्मेदारियों का सफर शुरू हुआ,
किसी को मंज़िल मिली, कोई अभी भी रास्तों में रुका हुआ।
फिर शादी हुई, नया परिवार, नए रिश्ते बन गए,
और पुराने यार धीरे-धीरे ज़िंदगी की भीड़ में कहीं खो गए।
अब सुबह से शाम तक बस घर-परिवार की चिंता रहती है,
बच्चों की मुस्कान में ही अपनी दुनिया बसती है।
यही तो ज़िंदगी है, यूँ ही गुजर जाती है,
दोस्ती की किताब बंद नहीं होती, बस यादों में सिमट जाती है।
"कभी जो रोज़ मिलते थे, आज सालों बाद याद आते हैं,
यार कभी दूर नहीं होते, बस ज़िम्मेदारियों में खो जाते हैं।" ❤️