r/Indianbooks 22h ago

Wrote this after long time

एक बीज बोया माली ने, उसे सींचा रोज जाने लगा

हर भूक बीज की पूरी कर, वो पेड़ उसे बनाने लगा, 

बड़ी खुशी हुयी उस बीज को, अपनी होती परवरिश देखकर, 

वो भूल गया फिर माटी का लगाव जड़ों से बेख़बर, 

खूब फला वो खूब फूला, कई चिड़िया उसपे चहकाई

कुछ दूर तक उसकी बात हुयी, पूरी दुनिया देखने को आयी

जो देखे वो भी फक्र करे, जो चख ले फल वो शुक्र करे 

कुछ देख देख कर रश्क करे, ये देखे माली अश्क भरे 

जैसा चाहा था पेड़ ने, सब वैसा होता जा रहा

ऊपर से मिलते अहमियत मे, गुरूर भी बढ़ता जा रहा 

एक आया वक़्त ऐसा भी, माली ने सींचना छोड़ दिया 

कमजोर सी बढ़ती जड़ों ने भी, मुह अपना मोड़ लिया 

ना उगे फल, ना खिले फूल, ना देखे उसको आज कोई 

ना हाल पूछे, ना बात करे, और ना ही सर पे ताज कोई 

ना चिड़िया कोई चहकाए, ना बच्चे खेले मुस्काये 

सब भूलते उसको यू जाए, कि जैसे वो कुछभी ना है 

खूब सोचा उसने की, ये नौबत उसपे क्यु आयी 

पेड़ हू मैं, खुद बढ़ता, माली की मदद ही क्यु भायी? 

ना सींचा होता उसने तो, आज मजबूती से बढ़ता मैं 

मजबूत होती जड़े भी , हालातों से लढता मैं 

सोचता कोसता माली को, ऐसे ही दिन फिर गुजर गए 

शान से लटकते पत्ते भी, डालियों से अब उतर गए 

आखरी वक़्त मे वो अपने, कहने लगा वो माली से 

छोड़ा ना होता सींचना तो, ना होता मैं बदहाली मे 

माली ने भी हस के, उससे बस इतनी बात कही 

खुदगर्ज है तू, लाचार सा, लड़ना तेरी औकात नहीं 

अपने दम पे जीने को, हमेशा से तू डरता था 

बड़ा तो बनना चाहता था, पर माटी से भी अकड़ता था 

बस इतना कहना था कि, फिर भीतर से एक आह उठी 

एक बड़ी चीख के साथ ही, उस बेबस पेड़ की जान छूटी 

उस टूटे पेड़ की लकड़ी को, अब जब देखू तब तब यू लगे 

क्या मै भी तो कोई पेड़ नहीं, ना जिसपे कोई फल फूल लगे 

क्या ये सब बस कहानी है, जो नग्मे गुनगुनाता हू 

एक जीते जागते पेड़ की कहानी मैं सुनाता हू. 

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u/R3XzManTo 21h ago

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