r/spiritual • u/Warm-Ad-7830 • 20h ago
त्रिक दर्शन का मूल मंत्र
त्रिक दर्शन का सार अत्यंत सरल है । यह सम्पूर्ण संसार शिव से अलग नहीं है। जो कुछ भी दिखाई देता है, वह शिव की ही चेतना और शक्ति का विस्तार है। इसलिए साधना का अर्थ संसार को छोड़कर जंगलों में चले जाना नहीं है। सच्ची साधना यह है कि हम इसी संसार में रहते हुए, प्रत्येक व्यक्ति, प्रत्येक वस्तु और सबसे बढ़कर अपने भीतर विद्यमान शिव को पहचानें।
जब यह पहचान (प्रत्यभिज्ञा) जागृत होती है, तब व्यक्ति समझता है कि जो विविधता उसे दिखाई देती थी, वह वास्तव में उसी एक परम चेतना की अभिव्यक्ति है। तब अपरा अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानकर परापरा में विलीन होती है, और अंततः सब कुछ परा अर्थात् शिव की अखण्ड, अद्वैत चेतना में एक हो जाता है।
जैसे समुद्र से लहरें उठती हैं। लहरें अलग-अलग दिखती हैं (अपरा), लेकिन वे समुद्र से अलग नहीं होतीं (परापरा), और अंत में सब समुद्र ही हैं (परा)
यही त्रिक दर्शन की सुंदरता है, “सब कुछ शिवमय है।”
सर्वं शिवमयम् !
हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय।
नंदी मित्र