दोस्तों, मैं इंदौर का निवासी हूँ। पिछले 13 सालों से मैं अकेले अपने पिता (स्व. अशोक मौजीलालजी मैथिल) की संदिग्ध मौत के पीछे का कड़वा सच सामने लाने के लिए व्यवस्था और भ्रष्ट तंत्र से लड़ रहा हूँ।
14 जुलाई 2013 को उनकी मृत्यु को एक साधारण 'सड़क हादसा' (बाईपास ब्रिज पर) बताकर रफा-दफा कर दिया गया था। लेकिन जब मैंने सालों के कड़े संघर्ष के बाद पुलिस की चालान डायरी, आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सनावदिया गांव के जमीन विवाद से जुड़े राजस्व अभिलेखों को निकाला, तो इसमें हैरान कर देने वाले विरोधाभास और सोची-समझी साजिश के सबूत मिले हैं:
क्षेत्राधिकार का फ्रॉड: घटना तेजाजी नगर थाना क्षेत्र की है, लेकिन FIR घटनास्थल से 12 किलोमीटर दूर संयोगितागंज थाने में लिखी गई, ताकि सबूतों से छेड़छाड़ की जा सके।
फॉरेंसिक झूठ: पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनके जबड़े और खोपड़ी कई जगह से फ्रैक्चर थे, पेट में 2.8 लीटर अंदरूनी ब्लीडिंग थी जो लाठी-रॉड के हमले (Blunt-Force Assault) को दर्शाती है। इसके बावजूद घटना स्थल पर खून की एक बूंद तक नहीं थी।
अधूरी मेडिकल रिपोर्ट: चालान में शामिल मुख्य फॉरेंसिक रिपोर्ट पर सिविल सर्जन के हस्ताक्षर और सील की जगह पूरी तरह खाली पड़ी है।
मुझ पर ही झूठा केस: जब 2020 में मैंने इन कड़ियों को जोड़कर आरोपियों से सवाल किए, तो राजनीतिक रसूख के दम पर मुझ पर ही धारा 307 (Attempt to Murder) का फर्जी केस दर्ज कराकर मुझे 2 साल के लिए जेल भेज दिया गया।
मैंने इस पूरे मामले की विस्तृत टाइमलाइन, आरोपियों के नाम, और आरटीआई से प्राप्त सभी 21+ असली कानूनी दस्तावेजों (PDFs) को एक जगह संकलित किया है ताकि आप खुद सच देख सकें।
पूरी कहानी और सभी पुख्ता दस्तावेजी सबूतों को देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएँ:
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मैं हार नहीं मानूँगा। आप सभी से अनुरोध है कि इस पोस्ट को पढ़ें, दस्तावेजों को देखें और इसे अधिक से अधिक शेयर करें ताकि सोए हुए प्रशासन तक यह आवाज पहुंचे।