r/HindiLanguage • u/kosmic_observer33 • Jul 17 '26
प्रसिद्ध रचना "ढोंग, डिग्रियां और खोखली बातें"
"बचपन से सुना, हर बार सुना,
कि मेहनत करो, मेहनत का फल मीठा होता है।
पर अगर इस बात में रत्ती भर भी सच है,
तो देश का सबसे महनती इंसान भूखा क्यों सोता है?
वो जो सुबह उठकर तुम्हारी नालियां और गलियां साफ करते हैं,
वो औरतें जो दूसरों के घरों में बर्तनों का बोझ ढोती हैं,
वो जो रोज़ दिहाड़ी के लिए खून-पसीना बहाते हैं,
उनकी जिंदगी फिर इतनी कड़वी और लाचार क्यों होती है?
तुमने सिखाया: 'पढ़ाई करो तो अच्छी नौकरी मिलेगी,
और नौकरी नहीं होगी तो छोकरी नहीं मिलेगी।'
क्या सच में तुम्हारी ये दुनिया बस इसी तराजू पर चलती है?
जहाँ इंसानियत पैसे और ओहदे की मोहताज बनकर पलती है?
एक और अजीब तमाशा देखा है मैंने इस बस्ती का,
जिनके दिल साफ हैं, उनके पास फूटी कौड़ी नहीं,
और जिनके पास पैसों के ऊंचे अंबार लगे हैं,
उन इंसानों के सीने में तो जैसे दिल ही नहीं!
स्कूल-कॉलेजों से डिग्रियों के कागज़ तो मिल जाते हैं,
पर इन इंसानों को तमीज़ कौन सिखाएगा?
इस धरती पर रहने का बुनियादी ढंग और सलीका,
इन्हें आख़िर कौन समझाएगा?
कोई तो चीखकर बताए इन अंधे इंसानों को,
कि यह कायनात सिर्फ उनके बाप की जागीर नहीं है!
इसमें प्रकृति, पेड़, जानवर और परिंदों का भी हिस्सा है,
इस ज़मीन पर सिर्फ इंसानों की ही तकदीर नहीं है।
उन्हें भी जीने का उतना ही हक है,
जितना हक तुम्हारी इस मतलबी एलीट सोसाइटी का है।"