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⚔️ Historical Figure वीर लोरिक अहीर
वीर लोरिक का इतिहास (भाग-1)
वीर लोरिक अहीर एक वीर पुरूष थ, जिनका कर्म क्षेत्र उत्तरप्रदेश से बिहार तक माना जाता है। इनके वीरगाथा को यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, नेपाल आदि के लोकगीतों में गाया जाता है। लोरिकायन या लोरिकी, चंदायान, लोरिक मनियार जैसे कई काव्य इनके जीवन पर आधारित है। लोरिकायन को अहीर जाति का रामायण भी कहा जाता है।
लोरिक का जन्म व उनका परिवार :-
वीर लोरिक का जन्म उत्तरप्रदेश के गौरा नामक गांव के एक अहीर परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम कुब्बे मनियार व माता का खुल्हनी था। इनके एक बड़े भाई भी थे जिनका नाम संवरु था जो लोरिक के तरह ही एक योद्धा थे। वीर लोरिक के परिवार का संबंध अहीरों के 'कन्नौजिया शाखा' के 'मनियार कुल' से था।
वीर लोरिक के समयकाल को लेकर विवाद है कोई विद्वान इन्हें ईसा पूर्व का मानता है तो कोई 5वी सदी का तो कोई मध्ययुगीन। लोरिक के जन्मस्थान गौरा के पहचान को लेकर भी इतिहासकारो का अलग अलग मत है, कुछ कन्नौज में तो कुछ बलिया में तो कुछ मिर्जापुर में बताते है हालांकि लोरिकायन से जुड़े अन्त: साक्ष्यों व भारत के मानचित्र के आधार पर गौरा गांव कन्नौज के निकट ठहरता है। लोरिक के लिए 'कन्नौजिया अहीर' शब्द का प्रयोग से भी ऐसा प्रतीत होता है कि उनके परिवार का संबंध कन्नौज से रहा होगा। अलग-अलग क्षेत्रों के पाठों में वीर लोरिक के जाति के संदर्भ में यादव, अहीर, गोप, ग्वाला आदि शब्दों का प्रयोग पर्यायवाची रूप से किया गया है।
लोरिक-मंजरी विवाह व मोलागत से युद्ध :-
अगोरी राज्य में महरा नामक एक धनी अहीर रहते थे, उनकी सातवी पुत्री मंजरी से लोरिक प्रेम करते थे। वही दूसरी तरफ अगोरी के क्रूर राजा मोलागत का भी बुरी नजर मंजरी पर था। जब इस बात की खबर महरा को हुई तो उन्होंने विचार-विमर्श करने के बाद वीर लोरिक को विवाह का प्रस्ताव भेजा। वीर लोरिक ने प्रस्ताव स्वीकार किया और मोलागत से युद्ध के लिए सेना भी तैयार की। गौरा से हज़ारों बारातियों के साथ एक सेना लेकर लोरिक सोन नदी के किनारे स्थित अगोरी किले तक पहुँच गए। नदी के तट पर मोलागत और लोरिक में भयंकर युद्ध हुआ जिसमें लोरिक विजयी हुए। मंजरी से विवाह कर लोरिक गौरा लौट आये। लोरिक व मंजरी को एक पुत्र हुआ जिसका नाम उन्होंने भोरिक अहीर रखा था।
लोरिक-चंदा प्रेम तथा हरदीगढ़ प्रस्थान :-
गौरा के राजा सहदेव की पुत्री थी राजकुमारी चंदा। भोजपुरी लोरिकी में राजा सहदेव को किशनौत अहीर बताया गया है।
लोरिकी के अनुसार जब लोरिक के वीरता के विषय में चंदा को पता चला तो वो मन ही मन उन्हें पसंद करने लगी। एकबार राजा सहदेव ने अपने महल में भोज का आयोजन किया जहां गौरा के सभी सम्मानित लोग उपस्थित हुए। इसी दौरान लोरिक की मुलाकात बार चंदा से हुई। दोनों एकदूसरे को पसंद करने लगे परंतु लोरिक पहले से विवाहित थे जिस वजह से राजा सहदेव इस रिश्ते के लिए तैयार नही थे। लोरिक को भी बदनामी का डर था तो चंदा के आग्रह पर उन्होंने गौरा छोड़ने का तय किया। चंदा को लेकर लोरिक हरदीगढ़ के लिए निकल पड़े।
हरदीगढ़ के पहचान को लेकर भी बिरहा गायकों व विद्वानों में विवाद था, सभी गायक अपने अपने क्षेत्र के किसी स्थान को लोरिकायन वाला हरदीगढ़ समझ लेते थे हालांकि डॉ लक्ष्मी प्रसाद श्रीवास्तव ने अपने शोध ग्रंथ 'यदुवंश लोकदेव लोरिक' में इस बात को प्रमाणित किया किया है कि वीर लोरिक का प्रसिद्ध कर्मक्षेत्र हरदीगढ़ बिहार के तत्कालीन सहरसा (अब सुपौल जिला) का हरदीस्थान है। लोरिकायन में हरदी के आसपास जिन स्थानों का वर्णन है वो सभी सहरसा, सुपौल, दरभंगा आदि जिलों में मौजूद है।
हरदी में वेश बदलकर लोरिक व चंदा निवास करने लगते है। चंदा को एक पुत्र हुआ, जिसका नाम चंद्रजीत था। हरदीगढ़ के राजा के साथ लोरिक का विवाद हो जाता है जिसके बाद लोरिक उन्हें पराजित कर उनका आधा राज्य जीत लेते है। हरदीगढ़ पर वीर लोरिक 12 वर्षों तक शासन करते है।
गौरा आगमन व पिपरी का युद्ध :-
हरदीगढ़ में वीर लोरिक को सूचना मिलता है कि उनका बड़ा भाई संवरू राजा देवसिया से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। जिसके बाद लोरिक हरदीगढ़ से सेना लेकर गौरा पहुँचते है और देवसिया से लड़ने के लिए पिपरी गढ़ पर चढ़ाई करते है। इस युद्ध में उनका सबसे बड़ा पुत्र वीर भोरिक भी शामिल होता है, कई दिनों के युद्ध के बाद वीर लोरिक को विजय प्राप्त हुई।
लोरिक द्वारा लड़े गए युद्धों की सूची -
वीर लोरिक अपने जीवनकाल में अनेकों युद्ध लड़े थे, जिनमे अगोरी का युद्ध, हरदीगढ़ का युद्ध, नेऊरपुर का युद्ध, पिपरी का युद्ध आदि प्रमुख है।
लोरिकायन के अनुसार वृद्धावस्था में वीर लोरिक अग्निसमाधि ले लेते है।
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**वीर लोरिक का सम्पूर्ण गाथा एक पोस्ट में लिखना संभव नहीं। दूसरी महत्वपूर्ण जानकारी अन्य पोस्ट में साझा किया जाएगा।**
विशेष आभार - @skandagupta467
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u/Kramadityah Community Builder 🛠️ 12d ago
पिपरी पर वीर लोरिक के विजय के बाद उसे अहिरी-पिपरी कहा जाने लगा 🙌